tujh se mila hooñ shukr hai parwardigaar ka | तुझ से मिला हूँ शुक्र है पर्वरदिगार का

  - Haider Khan

तुझ से मिला हूँ शुक्र है पर्वरदिगार का
कितना हसीन ख़्वाब है तू ख़ाकसार का

तुझ से मिली निगाह तो एसा लगा मुझे
बे-वक्त जैसे आ गया मौसम बहार का

इंसाँ की आदतों से मैं वाक़िफ़ हूँ अब बहुत
अब है न ए'तिबार किसी राज़दार का

सब इस क़दर ग़मों में हुए मुब्तला के अब
चलता है कारोबार बहुत ग़म-गुसार का

मुझको भी आपकी ये हिरासत नसीब हो
कब तक चलेगा दौर भला इंतिज़ार का

  - Haider Khan

Qismat Shayari

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