फिर वही हम पे वार करते हैं
जिन पे हम जाँ-निसार करते हैं
यार जितने अज़ीज़ हों उतनी
दुश्मनी शानदार करते हैं
बस में कुछ भी नहीं है और इंसान
नक़्ल-ए-पर्वरदिगार करते हैं
जान जाते हैं वो फ़रेब-ए-हुस्न
जो तेरा ए'तिबार करते हैं
आइने देख कर तेरा चेहरा
चुपके चुपके सिंगार करते हैं
वो भी पक्का नहीं है वा'दों का
हम भी कब इंतिज़ार करते हैं
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