zabaan pe apni pahle haar ka tum zaayka rakho | ज़बाँ पे अपनी पहले हार का तुम ज़ायका रक्खो

  - Haider Khan

ज़बाँ पे अपनी पहले हार का तुम ज़ायका रक्खो
फिर उसके बाद जाकर जीत का तुम मशवरा रक्खो

किसी में ऐब यारो तुम निकालो शौक़ से जब भी
उठा कर सब सेे पहले सामने तुम आइना रक्खो

नया है दौर इस
में खुल के मिलना है नहीं अच्छा
मिलो जब भी किसी से तुम यहाँ तो फासला रक्खो

कई शा
में गुज़ारी हैं ग़मों के साए में तुमने
गुज़र जाएगी ये शब भी ज़रा सा हौसला रक्खो

जड़ों से टूट जाए तो शजर भी सूख जाता है
बढ़ो आगे मगर अपने बड़ों से राब्ता रक्खो

  - Haider Khan

Urdu Shayari

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