इन पोरों की ख़ुशबू हूँ मैं
तू लिक्खे कुछ तो महकूँ मैं
ये माना है तू इक शो'ला
हूँ शबनम जो क्यूँ दहकूँ मैं
तेरी नज़रें मुझ को ढूँढ़े
तू देख ज़रा हर सू हूँ मैं
आवाज़ मिरी तू सुन जानाँ
बुलबुल ही सी तो चहकूँ मैं
रब से बस ये माँगूँ 'सलमा'
अपनी राहों से न बहकूँ मैं
— Salma Malik















