“ख़ुदा”
वो शा'इरी
वो तिश्नगी
वो कू-ब-कू
वो हर घड़ी
वो जो करे
है बेहतरी
वो आशिक़ी
वो मौसिक़ी
वो ज़िन्दगी
वो बन्दग़ी
वो जो नहीं
कुछ भी नहीं
वो रौशनी
वो तीरगी
सब कुछ ख़ुदा
सब कुछ वही
ये नज़्म क्या
कुछ भी नहीं
— Salma Malik
वो शा'इरी
वो तिश्नगी
वो कू-ब-कू
वो हर घड़ी
वो जो करे
है बेहतरी
वो आशिक़ी
वो मौसिक़ी
वो ज़िन्दगी
वो बन्दग़ी
वो जो नहीं
कुछ भी नहीं
वो रौशनी
वो तीरगी
सब कुछ ख़ुदा
सब कुछ वही
ये नज़्म क्या
कुछ भी नहीं
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