नज़्म: तुझ सेे मैं ने प्यार किया है
तुझ से मैं ने प्यार किया है
एक नई सी बात हुई है दुनिया सुंदर सी लगती है
महके बाग़ नहीं हैं लेकिन तेरे से ख़ुशबू रहती है
तू हँसती है ऐसे जैसे एक कली कोई खिलती है
चलती है तू ऐसे जैसे एक नदी कोई बहती है
तू अब माने या ना माने ख़ुद को तेरा मान लिया है
तुझ से मैं ने प्यार किया है
तुझ पर मर कर जीता हूँ के अब जीता हूँ यूँ लगता है
मुझ पर तेरा ही बस तेरा रोज़ फ़ितूर चढ़ा रहता है
तेरा हो कर भी न होना बेचैन मुझी को रखता है
होता है तुझ से दिन तेरे नाम बिना कब दिन ढलता है
माफ़ी! तुझ को हिचकी आए फिर से तेरा नाम लिया है
तुझ से मैं ने प्यार किया है















