तुझे ना आएंगी मुफ़लिस की मुश्किलात समझ
मैं छोटे लोगों के घर का बड़ा हूँ बात समझ
मेरे इलावा हैं छे लोग मुनहसीर मुझ पर
मेरी हर एक मुसीबत को जर्ब सात समझ
दिल ओ दिमाग ज़रूरी हैं ज़िन्दगी के लिए
ये हाथ पाऊँ इज़ाफ़ी सहूलियत समझ
फ़लक से कट के ज़मीन पर गिरी पतंगें देख
तू हिज्र काटने वालों की नफ़सियात समझ
किताब-ए-इश्क़ में हर आह एक आयत है
और आँसुओं को हुरूफ-ए-मुक़त्तेआत समझ
— Umair Najmi















