kisi ke vaaste gul hain kisi ko khaar hain ham log | किसी के वास्ते गुल हैं किसी को ख़ार हैं हम लोग

  - Varun Anand

किसी के वास्ते गुल हैं किसी को ख़ार हैं हम लोग
किसी के जानी दुशमन हैं किसी के यार हैं हम लोग

मुहब्बत कर तो लेते हैं मगर मजबूरियों के साथ
हमारा मसअला ये है दिहाड़ी-दार हैं हम लोग

उसे कहना दवा दे आके हमको अपने हाथों से
उसे कहना कई दिन से बड़े बीमार हैं हम लोग

दरो- दीवार से रिश्ता बनाकर दुख ही होना है
हमारा घर नहीं है ये किराएदार हैं हम लोग

हमारे जिस्म पर दुनिया का इक बाज़ार चस्पाँ है
किसी सरकारी बिलडिंग की कोई दीवार हैं हम लोग

कहीं क़स
में निभाते हैं कहीं पर तोड़ देते हैं
कहीं ईमान वाले हैं कहीं गद्दार हैं हम लोग

  - Varun Anand

Intiqam Shayari

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