कोई मिसाल नहीं है तिरी मिसाल के बा'द
मैं बे ख़याल हुआ हूँ तिरे ख़याल के बा'द
बस इक मलाल पे तू ज़िन्दगी तमाम न कर
बड़े मलाल मिलेगें मिरे मलाल के बा'द
हर एक ज़ख़्म को अश्कों से धो के चूम लिया
मैं ऐसे ठीक हुआ उस की देख-भाल के बा'द
उलझ के रह गया वो जाल में तबीबों के
मरीज़ घर नहीं लौटा है अस्पताल के बा'द
दुआ सलाम से आगे मैं बढ़ नहीं पाता
उसे भी सोचना पड़ता है हाल-चाल के बा'द
हमारे बीच में जो है सही नहीं है वो
उसे ये याद भी आया तो चार साल के बा'द
हज़ारों ख़्वाब जो आँखों के आसरे थे कभी
यतीम हो गए आँखों के इंतिक़ाल के बा'द
— Varun Anand















