तेरी यादों का कहीं लश्कर नहीं है
और मैं फ़ुटपाथ पर हूँ घर नहीं है
रात को क्या ओढ़ के सोऊँ बता तू
तेरी यादों की कोई चादर नहीं है
तू कभी आए तो आँचल देना मुझ को
जाँ मिरा हक़ अब तिरे दिल पर नहीं है
मिलने की ख़्वाहिश न रखना कह रहा हूँ
कह रहा हूँ मैं मिरा पैकर नहीं है
अपनी बाहों में सुला ले चाँदनी सुन
मैं कहूँ कैसे मिरा बिस्तर नहीं है
— Vaseem 'Haidar'















