उस की गर मुझ को याद आई तो
उस ने गर मुझ को दी दुहाई तो
मैं जिसे चाहता हूँ शिद्दत से
उस की गर हो गई सगाई तो
मैं उसे मिलने को वहाँ जाऊँ
वो न मुझ को गले लगाई तो
ग़ौर से इस लिए नहीं देखा
दिख गई उस की गर बुराई तो
शहर भर में हूँ छोड़ के घर को
वो मिरे घर कभी जो आई तो
आप इक मशवरा मुझे दोगे
गर मैं हो जाऊँ घर जमाई तो
— Vaseem 'Haidar'















