जली धरती बचाने के लिए आएमिली फ़ुर्सत बताने के लिए आएजहाँ के दर्द को सारे समझ अपनाख़ुशी अपनी चढ़ाने के लिए आएन आईना मिला है देखने हम कोबहुत ग़म है जताने के लिए आएन वादों पर किसी को है भरोसा अबयही सच है बताने के लिए आएमिला ख़त आज तेरा जब पढ़ा मैं नेख़ुदी को फिर हॅंसाने के लिए आए— Vinod Ganeshpure