कुछ एक लोग जो दिल के मकान में आए
पुराने सानहे सब मेरे ध्यान में आए
मैं चाहता हूँ कि मेरा भरम रहे क़ाएम
नहीं भी हो तो कोई दर्मियान में आए
दरख़्त-ए-दिल पे कोई उम्र भर नहीं ठहरा
बहुत से लोग यूँ तो सायबान में आए
— Vikram Sharma
पुराने सानहे सब मेरे ध्यान में आए
मैं चाहता हूँ कि मेरा भरम रहे क़ाएम
नहीं भी हो तो कोई दर्मियान में आए
दरख़्त-ए-दिल पे कोई उम्र भर नहीं ठहरा
बहुत से लोग यूँ तो सायबान में आए
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