क्या करूँँ जब समझ में ही आई नहीं
ज़िंदगी से मेरी कुछ लड़ाई नहीं
रंग मनमानियाँ कर रहे थे बहुत
मैं ने तस्वीर पूरी बनाई नहीं
जो बताना है खुल के बता मेरे दोस्त
तू मेरा दोस्त है मेरा भाई नहीं
— Vikram Gaur Vairagi
ज़िंदगी से मेरी कुछ लड़ाई नहीं
रंग मनमानियाँ कर रहे थे बहुत
मैं ने तस्वीर पूरी बनाई नहीं
जो बताना है खुल के बता मेरे दोस्त
तू मेरा दोस्त है मेरा भाई नहीं
Other ghazal from the same pen
Shers of dp.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling