तेरे आगे है सब तुझ को दिखाई दे रहा है
तेरा ग़म ख़ुद-ब-ख़ुद मुझ को रिहाई दे रहा है
मेरे सीने पे सर रक्खा है तो ख़ामोश मत रह
मुझे बतला तुझे जो भी सुनाई दे रहा है
तेरी ग़लती है ये हरगिज़ नहीं है तेरी ग़लती
तेरी ग़लती है तू उस पर सफ़ाई दे रहा है
अँधेरा वो कि जिस
में देखना मुमकिन नहीं है
मगर फिर भी अँधेरा क्यूँ दिखाई दे रहा है
मुझे पूछे बिना मुझ से मुहब्बत कर रहा है
मरज़ जाने बिना मुझ को दवाई दे रहा है
— Vikram Gaur Vairagi















