वो जो लिखा है सब किताबों में
वो ही शामिल नहीं निसाबों में
उस की तासीर ऐसे काटी है
हम ने घोला उसे शराबों में
ये मेरी हिचकियाँ बताती हैं
मैं बक़ाया हूँ कुछ हिसाबों में
तो कोई तजरबा ही कर लें क्या
कुछ नहीं मिल रहा किताबों में
हम उसे यूँ ही मिल गए होते
उस ने ढूँढ़ा नहीं ख़राबों में
आओ और आ के फिर बिछड़ जाओ
कुछ इज़ाफ़ा करो 'अज़ाबों में
— Vishal Bagh















