धीरे धीरे
ज़िंदगी ये कट रही है धीरे-धीरे
मौत सब में बँट रही है धीरे-धीरे
इस तरफ़ से मैं चलूँ
उस तरफ़ से तुम चलो
फिर यहीं पर हम मिलेंगे धीरे धीरे
इस तरह से काट लेंगे हम सफ़र ये
धीरे धीरे
बस यही है इल्तिजा तुम से ये मेरी
तुम न कहना अलविदा हम से कभी भी
अलविदा ये मारता है धीरे धीरे
रूह तक को काटता है धीरे धीरे
है बहुत लम्बा सफ़र मैं जानता हूँ
पर मैं भी तो चल रहा हूँ धीरे धीरे
ज़िंदगी के इस सफ़र में
हम कभी इस शहर में
जो ठहरने लग गए
तो समझ लेना कि वो घर आ गया है
सो सके हम जिस जगह पर चैन से अब
मौत भी हम को लगा ले जो गले अब
इस तरह से ख़त्म हो अपना सफ़र ये
धीरे धीरे















