कुछ न नुक़्सान जब हमारा किया
हम ने तब इश्क़ से किनारा किया
उस ने मुझ को ही रौशनी नहीं दी
मैं ने जिस जुगनू को सितारा किया
हो के ओझल यूँ आँखों से उस ने
सब की आँखों को बे-सहारा किया
थे वो हालात एक शाइ'र ने
शाइरी बेच कर गुज़ारा किया
इस लिए यार हो गया नाराज़
बात करनी थी पर इशारा किया
इस क़दर तल्ख़ थी ज़बाँ उन की
ज़ेहन को बातों से ही खारा किया
— Viru Panwar Viyogi















