Kumar Prem Pinaki

Kumar Prem Pinaki

@ZikrPinaki

Kumar Prem Pinaki shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Kumar Prem Pinaki's shayari and don't forget to save your favorite ones.

Followers

3

Content

20

Likes

43

Shayari
Audios
  • Sher

इतने चेहरे हैं दुनिया में
कोई हर चेहरे पर मरता क्या

तुमसे बेहतर यूँ न सोचा था
बस तुम पर मरता करता क्या

Kumar Prem Pinaki

इस दुनिया में जीते जी
सारी दुनिया हारी है

इक फाॅंसी के फंदे ने
कितनी लाश सॅंभाली है

Kumar Prem Pinaki

इक सफ़र ऐसा है जिसमें
मंज़िल की कोई बात नहीं

इक सफ़र ऐसा है जिसमें
मिलने की कोई रात नहीं

Kumar Prem Pinaki

आइने का सौदा कर
मुफ़लिसी में मर गया

सब मुखौटे बेच कर
हर कोई सँवर गया

Kumar Prem Pinaki

ये दुनिया कितनी प्यारी है
इसमें ही दुनिया सारी है

जीता है उसने कितना कुछ
इक शर्त अभी भी हारी है

Kumar Prem Pinaki

पहले हिम्मत बाँधी फिर
हिम्मत से दो चार किया

क़िस्मत की ऑंधी आई
हार नहीं स्वीकार किया

Kumar Prem Pinaki

प्रेम जब मन में हुआ
भेद सारे औन हैं

कर रहे हैं बात दिल
शब्द सारे मौन हैं

Kumar Prem Pinaki

जब शीश कटे फिर धड़ ये लड़े
लड़ते रहे उन हैवानों से

बाज़ी क्यों फिर हारी हमने
ये पूछो तुम ग़द्दारों से

Kumar Prem Pinaki

जितना जीवन तुम जीते हो
हमने उतने ही काटे हैं

तेज़ तपिश से तुम डरते हो
अंगारों से यहाँ नाते हैं

Kumar Prem Pinaki

जिस दुनिया को हम जीते हैं
कोई क्या ऐसे जीता है

गर जीता है तो सोचो फिर
मसअला कितना संजीदा है

Kumar Prem Pinaki

जीवन में इतनी बाधाएँ
हर बाधाएँ हम ढोए हैं

दिन का जगना तो लाज़िम है
रातों के सपने खोए हैं

Kumar Prem Pinaki

यादें ही देखो पूरी हैं
रूहों के जलने के लिए

धोखे यहाँ ज़रूरी हैं
यारों सॅंभलने के लिए

Kumar Prem Pinaki

टूटे हुए को ही यहाँ
जुड़ने की चाहत होती है

सागर को मिलने में ही कब
दरिया की आदत होती है

Kumar Prem Pinaki

पत्थर से मजबूत इरादे
टूटेंगे तो मिट्टी होंगे

ख़ुद की शर्तों पे मरते हैं
सोचो कितने ज़िद्दी होंगे

Kumar Prem Pinaki

किसका कितना हिस्सा है
किसने कितना पाया है

बातें जो अनसुलझी हैं
सब भोले की माया है

Kumar Prem Pinaki

मेरी अपनी कहानी है
मेरे अपने क़िस्से हैं

दर्द नहीं इक जैसा है
उसके भी कई हिस्से हैं

Kumar Prem Pinaki

मन जब मौन हो जाता है
ख़ुद में कौन हो जाता है

Kumar Prem Pinaki

दरिया इतना जो पानी लेकर बहता है
भीतर कोई कहानी लेकर बहता है

Kumar Prem Pinaki

मन में पहले सौ युद्ध हुए
जीते उनसे तब बुद्ध हुए

Kumar Prem Pinaki

संघर्ष बिना जो जीता है
वो जीता कोई खास नहीं

दुनिया में कोई राम नहीं
जिसका अपना वनवास नहीं

Kumar Prem Pinaki

LOAD MORE