@ZikrPinaki
Kumar Prem Pinaki shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Kumar Prem Pinaki's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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इतने चेहरे हैं दुनिया में
कोई हर चेहरे पर मरता क्या
तुमसे बेहतर यूँ न सोचा था
बस तुम पर मरता करता क्या
इस दुनिया में जीते जी
सारी दुनिया हारी है
इक फाॅंसी के फंदे ने
कितनी लाश सॅंभाली है
इक सफ़र ऐसा है जिसमें
मंज़िल की कोई बात नहीं
इक सफ़र ऐसा है जिसमें
मिलने की कोई रात नहीं
ये दुनिया कितनी प्यारी है
इसमें ही दुनिया सारी है
जीता है उसने कितना कुछ
इक शर्त अभी भी हारी है
पहले हिम्मत बाँधी फिर
हिम्मत से दो चार किया
क़िस्मत की ऑंधी आई
हार नहीं स्वीकार किया
जब शीश कटे फिर धड़ ये लड़े
लड़ते रहे उन हैवानों से
बाज़ी क्यों फिर हारी हमने
ये पूछो तुम ग़द्दारों से
जितना जीवन तुम जीते हो
हमने उतने ही काटे हैं
तेज़ तपिश से तुम डरते हो
अंगारों से यहाँ नाते हैं
जिस दुनिया को हम जीते हैं
कोई क्या ऐसे जीता है
गर जीता है तो सोचो फिर
मसअला कितना संजीदा है
जीवन में इतनी बाधाएँ
हर बाधाएँ हम ढोए हैं
दिन का जगना तो लाज़िम है
रातों के सपने खोए हैं
यादें ही देखो पूरी हैं
रूहों के जलने के लिए
धोखे यहाँ ज़रूरी हैं
यारों सॅंभलने के लिए
टूटे हुए को ही यहाँ
जुड़ने की चाहत होती है
सागर को मिलने में ही कब
दरिया की आदत होती है
पत्थर से मजबूत इरादे
टूटेंगे तो मिट्टी होंगे
ख़ुद की शर्तों पे मरते हैं
सोचो कितने ज़िद्दी होंगे
किसका कितना हिस्सा है
किसने कितना पाया है
बातें जो अनसुलझी हैं
सब भोले की माया है
मेरी अपनी कहानी है
मेरे अपने क़िस्से हैं
दर्द नहीं इक जैसा है
उसके भी कई हिस्से हैं
संघर्ष बिना जो जीता है
वो जीता कोई खास नहीं
दुनिया में कोई राम नहीं
जिसका अपना वनवास नहीं