जुदाई याद आती है सुकूँ दिन भर नहीं मिलता
    मैं जिसको चाहता हूँ वो मुझे अक्सर नहीं मिलता

    जुदा जब मैं हुआ उनसे तो मुझको ये समझ आया
    जो घर पर प्यार मिलता है किसी दर पर नहीं मिलता

    ग़लत रस्ता दिखाने को बहुत से लोग मिलते हैं
    सही गर रास्ता हो तो कोई रहबर नहीं मिलता

    गुज़ारो ग़म के दिन हँसकर मगर ये जान लो यारों
    सुकूँ जो रो के मिलता है कभी हँसकर नहीं मिलता

    इरादे साफ़ रखकर जो ग़रीबों का भला कर दे
    मुझे इस मुल्क में ऐसा कोई लीडर नहीं मिलता

    मिला है गर तुझे ’वर्धन’ तो बेशक प्यार करती है
    किसी को इतनी जल्दी फ़ोन का नम्बर नहीं मिलता
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    Harshwardhan Aurangabadi
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    मैं तेरे पास क्यूँ आया बेकार में?
    दर्द मिलता रहा उम्र भर प्यार में

    ढूँढते ढूँढते, मैं यहाँ थक गया
    माँ, पिता-सा, नहींं कोई संसार में

    अब तो उसके भी शादी के दिन आ गए
    ज़िंदगी मेरी गुज़री है रफ़्तार में

    वो मुसलसल उसे देखती रह गई
    जब मेरी फोटो आई थी अख़बार में

    मेरी इज्ज़त से उसको बहुत प्यार था
    फूल जड़ती थी वो मेरे दस्तार में

    जब तुझे छू के मुझ तक हवा आती है
    दर्द-ओ-ग़म आते हैं मेरे अश'आर में

    जीत का जश्न मैं भी मनाता मगर
    हार जाता है ‘वर्धन’ तेरी हार में
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    Harshwardhan Aurangabadi
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    क़दर कर लो ज़रा वरना तरस जाओगे मिलने को
    जब आयेगी ख़बर तुम तक कि अब तो मर गया 'वर्धन'
    Harshwardhan Aurangabadi
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    मेरे दिल में रहने के काबिल नहीं थी
    मुझे छोड़कर उसने अच्छा किया है
    Harshwardhan Aurangabadi
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    मैं सहम के ठहर ही गया भीड़ में
    जब तुम्हारे लबों ने कहा अलविदा
    Harshwardhan Aurangabadi
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    तेरे घर को आया सवेरे-सवेरे
    ग़ज़ब का सुकूँ था सवेरे-सवेरे

    उसे आज़माना था बस इश्क़ मेरा
    मुझे आज़माया सवेरे-सवेरे

    इरादा था तुझको भुलाने का लेकिन
    तू ही याद आया सवेरे-सवेरे

    मेरी जाँ क़सम से, परेशाँ था मैं तो
    तेरा ख़त जलाया, सवेरे-सवेरे

    तेरा साथ छूटा, तो यारों ने मेरे
    गले से लगाया, सवेरे-सवेरे
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    Harshwardhan Aurangabadi
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    बचाओ-बचाओ वो चिल्ला रही थी
    बिछड़कर जो मुझसे, मरे जा रही थी

    ग़ज़ल गर मैं कहता वो बदनाम होती
    कलम से मेरी वो डरे जा रही थी

    क़सम तोड़-के घर गई थी जो लड़की
    वो शादी में अपने क़सम खा रही थी

    मुझे जब दवा की जरूरत थी यारों
    नमक दे के मुझको वो तड़पा रही थी
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    Harshwardhan Aurangabadi
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    तेरा पास आना, तेरा दूर जाना
    नहीं है मोहब्बत, यही है हक़ीक़त
    Harshwardhan Aurangabadi
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    तीरगी मे रही बे-कसी रात भर
    दर्द देती रही, दिल्लगी रात भर

    मैं सवेरे तेरे शहर आता मगर
    ज़ख़्म आँखें दिखाती रही रात भर
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    Harshwardhan Aurangabadi
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    इन आँखों में अश्कों का पहरा है शायद
    मेरा दुख समंदर सा गहरा है शायद

    मेरी तेज़ धड़कन बताती है यारों
    रक़ीबों के घर से वो गुज़रा है शायद
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    Harshwardhan Aurangabadi
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