जुदा जब मैं हुआ उन से तो मुझ को ये समझ आया
जो घर पर प्यार मिलता है किसी दर पर नहीं मिलता
ग़लत रस्ता दिखाने को बहुत से लोग मिलते हैं
सही गर रास्ता हो तो कोई रहबर नहीं मिलता
गुज़ारो ग़म के दिन हँसकर मगर ये जान लो यारों
सुकूँ जो रो के मिलता है कभी हँसकर नहीं मिलता
इरादे साफ़ रख कर जो ग़रीबों का भला कर दे
मुझे इस मुल्क में ऐसा कोई लीडर नहीं मिलता
मिला है गर तुझे ’वर्धन’ तो बेशक प्यार करती है
किसी को इतनी जल्दी फ़ोन का नंबर नहीं मिलता
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मैं तेरे पास क्यूँ आया बेकार में?
दर्द मिलता रहा उम्र भर प्यार में
दर्द मिलता रहा उम्र भर प्यार में
ढूँढ़ते ढूँढ़ते, मैं यहाँ थक गया
माँ, पिता-सा, नहीं कोई संसार में
अब तो उस के भी शादी के दिन आ गए
ज़िंदगी मेरी गुज़री है रफ़्तार में
वो मुसलसल उसे देखती रह गई
जब मेरी फोटो आई थी अख़बार में
मेरी इज़्ज़त से उस को बहुत प्यार था
फूल जड़ती थी वो मेरे दस्तार में
जब तुझे छू के मुझ तक हवा आती है
दर्द-ओ-ग़म आते हैं मेरे अश'आर में
जीत का जश्न मैं भी मनाता मगर
हार जाता है ‘वर्धन’ तेरी हार में
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क़दर कर लो ज़रा वरना तरस जाओगे मिलने को
जब आएगी ख़बर तुम तक कि अब तो मर गया 'वर्धन'
जब आएगी ख़बर तुम तक कि अब तो मर गया 'वर्धन'
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