जुदाई याद आती है सुकूँ दिन भर नहीं मिलता

मैं जिस को चाहता हूँ वो मुझे अक्सर नहीं मिलता

जुदा जब मैं हुआ उन से तो मुझ को ये समझ आया
जो घर पर प्यार मिलता है किसी दर पर नहीं मिलता

ग़लत रस्ता दिखाने को बहुत से लोग मिलते हैं
सही गर रास्ता हो तो कोई रहबर नहीं मिलता

गुज़ारो ग़म के दिन हँसकर मगर ये जान लो यारों
सुकूँ जो रो के मिलता है कभी हँसकर नहीं मिलता

इरादे साफ़ रख कर जो ग़रीबों का भला कर दे
मुझे इस मुल्क में ऐसा कोई लीडर नहीं मिलता

मिला है गर तुझे ’वर्धन’ तो बेशक प्यार करती है
किसी को इतनी जल्दी फ़ोन का नंबर नहीं मिलता

— Harshwardhan Aurangabadi

More by Harshwardhan Aurangabadi

Other ghazal from the same pen

See all from Harshwardhan Aurangabadi →

Udasi Shayari

Shers of udasi.

All Udasi Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling