मेरा दावा है मुस्तक़बिल में पछतावा सनम होगा

मेरी शोहरत जो देखोगे मुझे खोने का ग़म होगा

तुम्हारे हिज्र का जो दर्द है झेला नहीं जाता
मैं फिर से दिल लगाऊँगा तभी ये दर्द कम होगा

तेरा हर सच छुपाने को मैं सब से झूठ कहता हूँ
अगर ग़लती से सच कह दूँ तो सोचो क्या सितम होगा

किसी के बा'द पूरी ज़िंदगी तन्हा रहूँगा पर
किसी का हो गया वर्धन किसी को ये भरम होगा

— Harshwardhan Aurangabadi

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