मेरे सीने पे ख़ंजर चला दीजिए
बे-वफ़ाई की मुझ को सज़ा दीजिए
मौत है कि बुलाने पे आती नहीं
ख़ुद-कुशी का मुझे रास्ता दीजिए
आप की ग़लतियों को भुलाया था मैं
मेरी गुस्ताख़ियों को भुला दीजिए
जो अना रखते हैं अपनी बुनियाद पर
आप बुनियाद उन की हिला दीजिए
मेरे हक़ में हैं लाखों दुआएँ मगर
आप मुझ को मुद्दा-ए-दुआ दीजिए
मेरी मय्यत सजाने आई थी वो
बात ये दोस्तों में बता दीजिए
मेरे बच्चों को यूँ आप मत डाँटिए
जो सुनाना है, मुझ को सुना दीजिए
— Harshwardhan Aurangabadi















