Nilesh Barai

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    आज नहीं तो कल तुझसे भी निकलेगा
    तूने गर मेरी आँखों में बोया आँसू

    ओ नादाँ इसमे आया तो डूबेगा
    मेरी आँख से टपका है उसका आँसू
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    ख़ुद को ऐसे तबाह कर लेंगे
    इश्क़ और फ़िर निक़ाह कर लेंगे

    आज मौका मिला है तो, लड़ ले
    फिर किसी दिन सलाह कर लेंगे

    सिर्फ़ तेरी खुशी की ख़ातिर हम
    ख़ुद पे भी इश्तिबाह कर लेंगे

    छोड़ कर तुम हमें नही जाना
    वर्ना कमरें सियाह कर लेंगे

    ज़िक्र यारी में इश्क़ का जो किया
    कूचा-ए-दिल रज़्म-गाह कर लेंगे

    क़स्र-ए-आलीशाँ छोड़ आये तिरा
    हम कहीं भी पनाह कर लेंगे

    क्या ज़रूरत है चारा-गर की हमें
    दर्द जब हो तो आह कर लेंगे

    वस्ल का तो मुझे पता ही नहीं
    हिज्र हम बे-पनाह कर लेंगे

    शायरी मौत की हुई जिस दिन
    जा के हम वाह-वाह कर लेंगे
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    दिल को यूँ शाद किये जाते हैं
    शैर आबाद किये जाते हैं

    दर्द इक भूल नहीं पाते हम
    और ईजाद किये जाते हैं

    तुमको ही भूलने की कोशिश में
    बारहा याद किये जाते हैं

    मन में तो क़ैद किये रक्खा है
    दिल से आज़ाद किये जाते हैं

    जिसने बर्बाद किया था मुझको
    उसको आबाद किये जाते हैं

    मुल्क में हालत-ए-बेकारी है
    उस पे अस्नाद किये जाते हैं

    आतिश-ए-ग़म से न जल जाये कहीं
    रूह फ़ौलाद किये जाते है

    या-ख़ुदा लोग तिरी दुनिया के
    ख़ूब फ़र्याद किये जाते हैं
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    गर दिखाना है तो ता-उम्र दिखा ये जज़्बा
    एक दिन का ये तेरा इश्क़-ए-वतन ठीक नही
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    और इक इंतज़ार हिस्से में
    कोई आसान काम दे मुझको
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    मुझे हर साथ तेरा छोड़ देना है
    बता, तू इसमे मेरा साथ देगा क्या?
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    डूब जाते हैं उन्ही के आंख में हम
    इस गली में कोई मै-खाना नही है।
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    ज़ीस्त आगे की अकेले ही बितानी है हमें
    हिज्र की आदत अभी से डाल लेनी चाहिये।
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    इससे ज़्यादा और भयानक क्या ही होगा
    भूखा बच्चा पीता है बस बहता आँसू
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    मेरी मौत पर ये शोर ये सवाल आज क्यों
    आज एक अर्सा हो गया मरे हुए मुझे
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