दिल को यूँँ शाद किए जाते हैं
शैर आबाद किए जाते हैं
दर्द इक भूल नहीं पाते हम
और ईजाद किए जाते हैं
तुम को ही भूलने की कोशिश में
बारहा याद किए जाते हैं
मन में तो क़ैद किए रक्खा है
दिल से आज़ाद किए जाते हैं
जिस ने बर्बाद किया था मुझ को
उस को आबाद किए जाते हैं
मुल्क में हालत-ए-बेकारी है
उस पे अस्नाद किए जाते हैं
आतिश-ए-ग़म से न जल जाए कहीं
रूह फ़ौलाद किए जाते है
या-ख़ुदा लोग तिरी दुनिया के
ख़ूब फ़र्याद किए जाते हैं
— Nilesh Barai















