आह जो मुझ पर उछाली जा रही है

हैराँ हूँ हर बार ख़ाली जा रही है

मुझ को अच्छा बोल कर लाया गया था
और मिरी ग़लती निकाली जा रही है

तेरे चेहरे ने ये बतलाया है मुझ को
के मिरी हर बात टाली जा रही है

इश्क़ राएगाँ है तो इतना बता दो
क्यूँ ये राएगानी पाली जा रही है

तीरगी ने दिल में ऐसे घर किया है
लग रहा जैसे दीवाली जा रही है

रफ़्ता रफ़्ता याद तुम आने लगी हो
रफ़्ता रफ़्ता रात काली जा रही है

— Nilesh Barai

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