अजीब हादसा हुआ अजीब सानेहा हुआ
मैं ज़िन्दगी की शाख से हरा भरा जुदा हुआ
वो ख़द-ओ-ख़ाल देख कर सभी के होश उड़ गए
नहीं के सिर्फ़ आईना हवा से वाख़्ता हुआ
हवा चली तो उस की शाल मेरी छत पे आ गिरी
ये उस बदन के साथ मेरा पहला राब़्ता हुआ
— Zia Mazkoor
मैं ज़िन्दगी की शाख से हरा भरा जुदा हुआ
वो ख़द-ओ-ख़ाल देख कर सभी के होश उड़ गए
नहीं के सिर्फ़ आईना हवा से वाख़्ता हुआ
हवा चली तो उस की शाल मेरी छत पे आ गिरी
ये उस बदन के साथ मेरा पहला राब़्ता हुआ
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