भँवर के बीच समुंदर ने जिस को पाला था
उसे ज़मीन ने साहिल पे मार डाला था
गवाह अपने बयानों से फिर गए वरना
मैं अपने जुर्म का इक़रार करने वाला था
ये राय किस ने दी सूरज को घूर कर देखो
अँधेरा बन गया आँखों में जो उजाला था
— Zohair Ahmad Sahil
उसे ज़मीन ने साहिल पे मार डाला था
गवाह अपने बयानों से फिर गए वरना
मैं अपने जुर्म का इक़रार करने वाला था
ये राय किस ने दी सूरज को घूर कर देखो
अँधेरा बन गया आँखों में जो उजाला था
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