तू तड़ाक से कब कैसे कोई हजरात बने है
आदमी मिट जाए तब जाके कहीं बात बने है
अजब मसअला बना रखा है इन दानिशमंदों ने
इन दीवानों की भला कब कौन सी जात बने है
जैसे वो लिपटता रहा मेरे फ़िराक में मुझ से
यूँ दिन से ख़ामुशी लिपट जाए तो रात बने है
— अनुराग दरवेश
आदमी मिट जाए तब जाके कहीं बात बने है
अजब मसअला बना रखा है इन दानिशमंदों ने
इन दीवानों की भला कब कौन सी जात बने है
जैसे वो लिपटता रहा मेरे फ़िराक में मुझ से
यूँ दिन से ख़ामुशी लिपट जाए तो रात बने है
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