याद कर के जब भी मुझ को सोचना तुममेरी आँख की बारिश को ख़ुद ही पोंछना तुममैं सवाल-ए-हक़ करूँगा लाज़िमी हैमैं ग़लत हूँ झूठ कह कर रोकना तुम— Amit Joshi anhad