अकेले प्रीति हम सेे कोई गाई ही नहीं जाती
बिना उसके कभी भी धुन बनाई ही नहीं जाती
खलिश कैसी सभी करते हैं चुपके और चुपके से
मगर देखो मुहब्बत तो सिखाई ही नहीं जाती
सिलेबस में हमारे सब है आता जानलो तुम सब
मुहब्बत की किताबें जो पढ़ाई ही नहीं जाती
महज उसके पड़े हैं चैट सारे फोन में मेरे
बता देना कभी यादें मिटाई ही नहीं जाती
मुहब्बत कौन थी पहली बताऊं, यार छोड़ो भी
ग़ज़ल कोई अधूरी तो सुनाई ही नहीं जाती
न जाने लोग कैसे? 'इश्क़ भी दो-चार करते हैं
यहाँ पहली मुहब्बत तो भुलाई ही नहीं जाती
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