तुम्हें तो काम करना है
सुब्ह से शाम करना है
अमाँ शाइ'र करेंगे क्या?
उन्हें बस नाम करना है
मिली सीता मुझे ऐसी
कि ख़ुद को राम करना है
जहाँ उपकार करना है
वहाँ गुमनाम करना है
हमें तलवार मत दो अब
क़लम से काम करना है
करें कुछ काम भी हाकिम
कि सब नीलाम करना है
— Aakash Kumar yadav















