याद में जब भी ख़ुदा जोता नहींज़िंदगी में फिर मज़ा होता नहींइस क़दर तुम हो निगाहों में मेरीचाह कर भी मैं कभी रोता नहींज़ेहन में तुम हो समाए इस क़दरनींद आती है मगर सोता नहीं— Manish