मैं दुनिया से बहलता जा रहा था

मगर कुछ तो फिसलता जा रहा था

तुम्हारी याद आई थी मुझे कल
मैं चलता और चलता जा रहा था

तुम्हारे इश्क़ में सब हार कर वो
नशे में था टहलता जा रहा था

वो डोली में किसी की जा रही थी
वो आशिक़ हाथ मलता जा रहा था

— Akash Rajpoot

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