मैं दुनिया से बहलता जा रहा था
मगर कुछ तो फिसलता जा रहा था
तुम्हारी याद आई थी मुझे कल
मैं चलता और चलता जा रहा था
तुम्हारे इश्क़ में सब हार कर वो
नशे में था टहलता जा रहा था
वो डोली में किसी की जा रही थी
वो आशिक़ हाथ मलता जा रहा था
— Akash Rajpoot
मगर कुछ तो फिसलता जा रहा था
तुम्हारी याद आई थी मुझे कल
मैं चलता और चलता जा रहा था
तुम्हारे इश्क़ में सब हार कर वो
नशे में था टहलता जा रहा था
वो डोली में किसी की जा रही थी
वो आशिक़ हाथ मलता जा रहा था
Other ghazal from the same pen
Voices in the same orbit
Poetry by feeling