मौसम उदास है ये फ़ज़ाएँ उदास हैं
रुत मुज़्महिल है चारों दिशाएँ उदास हैं
अब तो बदन में दर्द भी बाक़ी नहीं कहीं
हर ज़ख़्म भर गया है दवाएँ उदास हैं
तुम थे तो शोख़ियों पे बहुत नाज़ था मुझे
अब तुम चले गए तो ख़ताएँ उदास हैं
शामिल थे तुम दुआ में तो दुनिया हसीन थी
तुम बिन हमारे दिल की दुआएँ उदास हैं
क्या पूछते हो बारहा तन्हाई का सबब
कितनी दफ़ा तुम्हें ये बताएँ उदास हैं
— Akash Rajpoot















