ये तग़ाफ़ुल के ये उस्लूब समझते हैं हम
इन अदाओं का सबब ख़ूब समझते हैं हम
इश्क़ से ज़िस्म का मंसूब समझते हैं हम
ऐसे मंसूब को मायूब समझते हैं हम
तू न समझे तो न समझे ये तिरी मर्ज़ी है
पर अभी तक तुझे महबूब समझते हैं हम
मुस्कराते हुए यूँ अश्क छुपाने का हुनर
यार आकाश तुम्हें ख़ूब समझते हैं हम
— Akash Rajpoot















