abhii kuchh aur pal baitho chale jaana thehar jaao | अभी कुछ और पल बैठो चले जाना ठहर जाओ

  - Aqib khan

अभी कुछ और पल बैठो चले जाना ठहर जाओ
सभी हैं ग़लतियाँ मेरी मैं ने माना ठहर जाओ

बहुत डर लगता है तुमको अकेले आने जाने में
सफ़र लंबा है रस्ता भी है अंजाना ठहर जाओ

ज़रा देखो ये मौसम को कि बरसेगी घटा काली
कभी मेरी भी तो सुन लो चली जाना ठहर जाओ

जो उसकी आँखों में देखा नशा तो हो ही जाना है
कहीं अब लग न जाए कोई जुर्माना ठहर जाओ

मैं जो गलती करूँँ फिर से तो फिर से ग़ुस्सा होना तुम
जो मैं फिर से कहीं भटकूँ तो समझाना ठहर जाओ

ठहर जाओ ठहर जाओ ठहर जाओ ठहर जाओ
ये कहता फिर रहा है यार दीवाना ठहर जाओ

  - Aqib khan

Dar Shayari

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