कोई नया सा ज़ाविया तलाश कर ले ज़िंदगी
वगरना अपना रास्ता निकाल लेगी ख़ुद-कुशी
ये क्या ज़मीन हिल गई ये क्या तमाम मर गए
लगा ले मोल जान का तू ऐ ख़ुदा सही सही
ये नामचीन-ओ-ख़ानदानी थे मकाँ ये क्यूँ ढहे
वही पुराना वाक़िआ थी नींव ही हिली हुई
फिर इक दफ़ा है छोड़ दी यूँँ नौकरी हुज़ूर ने
कि नौकरी की उनके फिर उसूलों से नहीं बनी
यक़ीन तो नहीं मुझे मगर मैं फिर भी डर रहा
अगर जो जन्म फिर हुआ तो खेल होगा फिर वही
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