बनी बनाई ही ढा रहा थाये कैसी दुनिया बना रहा थाबड़ा सितम था कि दिल मकाँ परजो आ रहा था वो जा रहा थाफ़रेब ओ धोकों के इस जहाँ मेंनिभाने वाला निभा रहा थाकोई तो ढूँढो कहाँ गया वोवही जो अपना बता रहा थाकिसी के दिल से गया निकालाकिसी के रस्ते में आ रहा था— Aqib khan