man bhar gaya hai mujhse to dilbar badalkar dekh lo | मन भर गया है मुझ सेे तो दिलबर बदलकर देख लो

  - Aqib khan

मन भर गया है मुझ सेे तो दिलबर बदलकर देख लो
क्या एक ही दर पर रहोगे दर बदलकर देख लो

इस
में तो कोई शक नहीं हैं ख़ूबसूरत आप पर
मेरी तवज्जो चाहिए तेवर बदलकर देख लो

माँ बाप पर जो बोझ है आसान लगता है तुम्हें
तुम उनकी ज़िम्मेदारियाँ पल भर बदल कर देख लो

इन चिंदियों के आने से कुछ भी न बिगड़ा है मेरा
इक और मौका है कि तुम लश्कर बदल कर देख लो

ये नौकरी आकिब तुम्हारे बस की बिल्कुल भी नहीं
ये 'इश्क़ छोड़ो यार तुम दफ़्तर बदलकर देख लो

  - Aqib khan

haseen Shayari

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