दिल-लगी दिल की लगी बन जाएगी
हर ख़ुशी फिर बेबसी बन जाएगी
रौशनी भी तीरगी बन जाएगी
इस तरह की ज़िन्दगी बन जाएगी
जब तलक ज़िंदा हो खुल कर बोल लो
ख़ुद-ब-ख़ुद ही ख़ामुशी बन जाएगी
आज ही हिस्से में आई है ख़ुशी
और उदासी आज ही बन जाएगी
आ रहे हैं जिस तरह ग़म राह में
जल्द ही अब बे-हिसी बन जाएगी
उस की आँखें तुम ने भी पढ़ ली हैं दोस्त
शा'इरी की तुम से भी बन जाएगी
वो तिरा हो जाएगा.. आया बड़ा
जैसे सहरा में नदी बन जाएगी
— Aqib khan















