vo le rakha tha jo karza udhaar nainon ne | वो ले रखा था जो कर्ज़ा उधार नैनों ने

  - Aqib khan

वो ले रखा था जो कर्ज़ा उधार नैनों ने
उतार डाला है रोकर वो यार नैनों ने

हमारे साथ वही हादसा हुआ फिर से
बना लिया हमें फिर से शिकार नैनों ने

सज़ा-ए-मौत भी कम होनी चाहिए इनको
किए हैं क़त्ल भी तो बेशुमार नैनों ने

कहा न कुछ भी किसी ने, समझ गए लेकिन
किया था नैनों का यूँँ ऐतबार नैनों ने

बदल दिया है इन्हें अब उसी ने दरिया में
समझ लिया था जिसे ग़म-गुसार नैनों ने

नए नए थे जो झाँसे में आ गए हैं वो
इरादे जान लिए जानकार नैनों ने

अभी भी मौका है बच जाओ फिर न कहना तुम
कि ज़द में ले लिया है धार-दार नैनों ने

  - Aqib khan

Dost Shayari

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