अदाओं का जादू दिखाओ कभी तुम
उतर के तो ज़ीने से आओ कभी तुम
वगरना तो श्रृंगार बेकार हैं सब
अगर जो न दिल को सजाओ कभी तुम
मैं लिखने लगा हूँ नये से क़सीदे
कि इस बह्र में भी नहाओ कभी तुम
है नेकी कमाने का अच्छा तरीक़ा
कि रोते हुए को हँसाओ कभी तुम
ग़मों की नमी भी फिर उड़ने लगेगी
चराग़ एक दिल में जलाओ कभी तुम
दरीचा तो खोलो कभी अपने मन का
ग़लीचा-ए-दिल तो बिछाओ कभी तुम
मेरी कैफ़ियत यूँँ तो अच्छी है लेकिन
है अरमान दिल में कि आओ कभी तुम
अमान इक नसीहत है तुमको हमारी
सही वक़्त पर दिल लगाओ कभी तुम
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