यूँँ तो यूँँ चाह कर कुछ मिला ही नहीं
आँख कहती रही कुछ गिला ही नहीं
मैं समझ जाता तो यूँ ना रोता अभी
प्यार सच्चा वे जो मिला ही नहीं
कान्हा कहते रहे भाग चल मेरे संग
राधा रानी का मन पर डिगा ही नहीं
— Aryan Goswami
आँख कहती रही कुछ गिला ही नहीं
मैं समझ जाता तो यूँ ना रोता अभी
प्यार सच्चा वे जो मिला ही नहीं
कान्हा कहते रहे भाग चल मेरे संग
राधा रानी का मन पर डिगा ही नहीं
Other ghazal from the same pen
Shers of shikwa.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling