अश्क आँखों तलक वो लाता फिर
मेरी कमियाँ मुझे गिनाता फिर
हाल मेरा वो देखने आता
कुछ समय रुक के लौट जाता फिर
मुझ को तो दोस्ती नहीं आती
प्यार करना कहाँ से आता फिर
जो ग़लत था कहीं अगर मैं तो
वक़्त रहते मुझे बताता फिर
एक करना अगर नहीं मुमकिन
एक जैसा नहीं बनाता फिर
इश्क़ बर्बाद सिर्फ़ अगर करता
कोई क़िस्से नहीं सुनाता फिर
— Avinash bharti















