इश्क़ सारा ज़िंदगी पे वार कर

जीत हम ने ली है बाज़ी हार कर

है ज़रूरत तुझ को भी तो साथ की
हर किसी को यूँ न तू इनकार कर

रस्ते में आती रहेंगी मुश्किलें
मंज़िलों की सोच इनको पार कर

नफ़रतें फ़ैली हैं चाहे हर तरफ़
मशवरा मेरा यही है प्यार कर

धीरे धीरे सब सही हो जाएगा
बस भरोसा ख़ुद पे तू हर बार कर

जीते जी मिलना नहीं मुमकिन है तो
ख़ुद को इक दिन आउँगा मैं मारकर

— Avinash bharti

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