मुहब्बत में ग़मो से पार जाने का
किया है फ़ैसला अब हार जाने का
भरा लगता था आने से तेरे जो घर
है अब मातम-कदा त्यौहार जाने का
कहानी चल रही है और ख़ुश हैं सब
किसे दुख छूट इक क़िरदार जाने का
सफ़र में मुश्किलें तो हैं मगर मैं ने
इरादा कर लिया इस बार जाने का
वो मज़हब की लड़ाई ख़त्म तो कर दे
मगर डर है उसे सरकार जाने का
— Avinash bharti















