जुदा हो कर किसी से क्या बचा बाक़ी मिरे अंदर
असर है हिज्र का ये जो ख़ला बाक़ी मिरे अंदर
मुझे तुम से जुदा कर के ख़ुदा ने जो ख़ता की है
उसे मालूम है अब भी गिला बाक़ी मिरे अंदर
रुकावट इश्क़ में जिस से सहारा हिज्र में उस से
अजब किरदार है ये जो अना बाक़ी मिरे अंदर
कभी जो आइना देखूँ तेरा ही अक्स दिखता है
बचा कुछ भी नहीं तेरे सिवा बाक़ी मिरे अंदर
बड़ी मुश्किल से समझाया था दिल को मैं ने कल फिर भी
बचा ही रह गया इक मसअला बाक़ी मिरे अंदर
— Ayush Gupta














