तेरी ही ज़िद करता हूँ
'इश्क़ में थोड़ा कच्चा हूँ
छोड़ दिया अच्छा कह कर
मोती हूँ पर ज़ाया' हूँ
वो तो सदा देता होगा
मैं ही शायद बहरा हूँ
जान नहीं दूँगा अपनी
मैं बस यूँँ ही कहता हूँ
क्यूँँ मैं टूटा हूँ इतना
क्या मैं कोई वा'दा हूँ
मुझको क्यूँँ चुप करते हो
तेरा ही तो तोता हूँ
दो दिन की ख़ातिरदारी
क़ुर्बानी का बकरा हूँ
दिल में मुझको तू रख ले
जैसे कोई शिकवा हूँ
यार मुझे तू फुसला ले
सीधा सादा बच्चा हूँ
दर्द मेरा क्या समझोगे
ख़िज़्र हूँ मैं औ भटका हूँ
कान्हा हो तुम लेकिन मैं
राधा हूँ या मीरा हूँ
कल मैं ग़ज़लें काटूँगा
आज मैं आँसू बोता हूँ
मेरा जाने क्या होगा
पानी हूँ औ ठहरा हूँ
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