आँखों में तेरी गर जो ये काजल न रहेगा
दीदार तेरा फिर तो मुकम्मल न रहेगा
इक शाम वो भी आएगी जब याद करोगी
पर याद भी करने को कोई पल न रहेगा
जब भीगने लग जाओगे यादों में किसी की
बरसात भी थम जाएगी बादल न रहेगा
दिल भी तो समझ जाएगा इक दिन ये हक़ीक़त
हर दम ही मोहब्बत में तो पागल न रहेगा
हम आज परेशान हैं जिस दर्द को लेकर
बेचैन हो जाएँगे अगर कल न रहेगा
ग़म इसका नहीं है कि हमें छोड़ गया वो
ग़म ये है ‘अभी’ ग़म भी मुसलसल न रहेगा
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